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मनुष्य संस्कारों के बिना पशु समान

मनुष्य संस्कारों के बिना पशु समान, आर्य जगत ने वैदिक प्रवचनों की सुविख्यात विदुषी भजनो उपदेशिका संगीता आर्य (एवं भजनों के माध्यम से वैदिक परम्पराओं के (सहारनपुर) पालन कारक जीवन को सरल बनाने, सर्वकल्या

संवाददाता प्रिंस  रस्तोगी मवाना मेरठ

मवाना : आर्य समाज मवाना के तत्वावधान में आयोजित ऋषि बोधोत्सव कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसमें प्रातःकालीन यज्ञ आचार्य वेद‌पाल शास्त्री के ब्रह्मत्व में हुआ। जिसमें पवन रस्तोगी, विकास रस्तोगी, मूलशंकर, प्रमोद कुमार राजेश कुमार, मधु आदि सपत्निक यज्ञमान बनें। पवित्र वेद मंत्रों से यज्ञ की पूर्ण आहुती की गई।

आर्य जगत ने वैदिक प्रवचनों की सुविख्यात विदुषी भजनो उपदेशिका संगीता आर्य (एवं भजनों के माध्यम से वैदिक परम्पराओं के (सहारनपुर) पालन कारक जीवन को सरल बनाने, सर्वकल्याण करनेपखण्डों-अंधविश्वासों को त्यागने का संदेश दिया। महर्षि दयानंद ने सोलह संस्कारों के अनुसार जीवन जीने को कहा क्योकि मनुष्य का जीवन संस्कारों के बिना पशुओं के समान है। जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त संस्कारो का पालन करना चाहिए। उन्होने बताया कि प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में पंच महायज्ञ – ब्रह्मयज्ञ, देवयज्ञ, पितृयज्ञबलि वैश्वदेवयज्ञ अतिथि यज्ञ अवश्य करने चाहिए क्योकि यज्ञ को विश्व का सर्वश्रेष्ठतम कर्म कहा गया है। यज्ञ से मनुष्य की शारीरिक, आत्मिक, भौतिक उन्नति होती है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए, आर्य समाज मवाना के मंत्री अनिल गोला ने कहा कि सम्पूर्ण विश्व में महर्षि दयानन्द जी का द्वि जन्म शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है। हम सभी आर्यों को चाहिए कि महर्षि द‌यानन्द की शिक्षाओं का पालन करें, वैदिक धर्म का प्रचार-प्रसार करे “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” का उद्‌घोष सत्यापित करें। 

प्रधान पवन रस्तोगी द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में मुख्यतः नरेन्द्र रस्तोगी, अनिल गोला, सुनील गुप्ता, होशियार सिंह, डॉ०वीरपाल, आलोक कुमार, कृष्णमोहन पालीवाल, सुधा रस्तोगी, कुसुम सर्राफ, संगीता रस्तोगी सीमा गोला, अनिका गोला, सावित्री, डॉ० शक्ति साहनी, आदि उपस्थित रहें।

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