बसुहार की सरकारी गल्ले की दुकान पर लाभार्थियों के हक पर सवाल
पत्रकार अमित कुमार
कौशांबी। नेवादा ब्लॉक के बसुहार गांव में सुनीता नाम की सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान को लेकर लाभार्थियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि लाभार्थियों से ई-पॉस मशीन पर अंगूठा लगवा लिया जाता है, लेकिन राशन नहीं दिया जाता।लाभार्थियों के मुताबिक, दुकान पर कहा जाता है—“अंगूठा लगा दीजिए, गल्ला नहीं है… बाद में मिलेगा।” वहीं कुछ लोगों से कथित तौर पर 23 रुपये प्रति किलो के हिसाब से पैसा लेने की बात भी कही जाती है।सवाल यह है कि जब राशन उपलब्ध नहीं था तो लाभार्थियों का अंगूठा क्यों लगवाया गया?
क्या सरकारी रिकॉर्ड में राशन वितरण दिखाकर वास्तविक लाभार्थियों को उनके हक से वंचित किया जा रहा है?
दुकानदार का कथित जवाब—“गल्ला नहीं है, अगले महीने दे देंगे”—अगर जांच में सही पाया जाता है तो यह सार्वजनिक वितरण व्यवस्था की गंभीर अनियमितता का मामला हो सकता है।
अब देखना यह है कि पूर्ति विभाग इन आरोपों की जांच कब करता है और लाभार्थियों के हक का राशन दिलाने के साथ जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।








