7.6 फीट चौड़े ट्रैक्टर के निकलने में भी परेशानी का ग्रामीणों का दावा, IGRS निस्तारण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
संग्रामगढ़/कुंडा, प्रतापगढ़। ग्राम सभा संग्रामगढ़, तहसील कुंडा क्षेत्र में स्थित गाटा संख्या 1418 के चकमर्ग को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई और IGRS शिकायत के निस्तारण पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक रास्ते के रूप में दर्ज इस भूमि को प्रशासनिक रिपोर्ट में खाली बताया गया है, लेकिन मौके पर रास्ते की स्थिति अभी भी पूरी तरह आवागमन योग्य नहीं है।
मामला चकमर्ग से कथित अतिक्रमण हटाने को लेकर की गई जनसुनवाई IGRS शिकायत के बाद सामने आया। शिकायतकर्ता ने सार्वजनिक रास्ते को अतिक्रमण एवं अवरोध से मुक्त कराने की मांग की थी।
- प्रशासनिक रिपोर्ट में चकमर्ग खाली होने का दावा
उपलब्ध प्रशासनिक आख्या के अनुसार, नायब तहसीलदार कुंडा की जांच में ग्राम संग्रामगढ़ स्थित गाटा संख्या 1418, क्षेत्रफल 0.0290 हेक्टेयर, राजस्व अभिलेखों में चकमर्ग के रूप में दर्ज पाया गया। आख्या में बताया गया कि चकमर्ग के आंशिक हिस्से पर रखी ईंट और टीनशेड को राजस्व एवं पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा हटाया गया और चकमर्ग की भूमि को खाली बताया गया।
हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि मौके की स्थिति प्रशासनिक रिपोर्ट से पूरी तरह मेल नहीं खाती। इसी को लेकर अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि रास्ता पूरी तरह खाली और आवागमन योग्य है तो मौके पर वाहनों के आवागमन में परेशानी क्यों बनी हुई है?
- 7.6 फीट चौड़े ट्रैक्टर के निकलने में भी परेशानी का दावा
स्थानीय लोगों के अनुसार चकमर्ग की वास्तविक उपयोगी चौड़ाई लगभग 8 फीट 3 इंच के आसपास है। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 7.6 फीट चौड़ा ट्रैक्टर भी रास्ते से आसानी से नहीं निकल पा रहा है।
ईंट, मोरंग और गिट्टी लेकर आने-जाने वाले ट्रैक्टर चालकों को परेशानी होने की बात भी ग्रामीणों ने कही है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड में रास्ता सार्वजनिक चकमर्ग है और प्रशासनिक रिपोर्ट में इसे खाली बताया गया है, तो मौके पर आवागमन में बाधा आखिर किस वजह से बनी हुई है?
- कूड़ा और निर्माण सामग्री से रास्ते के उपयोग पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि चकमर्ग का एक हिस्सा नियमित आवागमन के बजाय कूड़ा डालने और अन्य सामग्री रखने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। रास्ते पर कूड़ा, निर्माण सामग्री अथवा अन्य अवरोध होने के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यदि यह भूमि राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक चकमर्ग के रूप में दर्ज है, तो उसे पूरी तरह अवरोधमुक्त और उपयोग योग्य बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन की बनती है।
- उपमुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी समाधान पर सवाल
ग्रामीणों के अनुसार मामला प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तक भी पहुंचा था। उनके निर्देश के क्रम में IGRS के माध्यम से शिकायत पर कार्रवाई की गई। इसके बाद एसडीएम, नायब तहसीलदार और लेखपाल स्तर से जांच एवं रिपोर्ट की कार्रवाई हुई।
हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार्रवाई मुख्य रूप से उस हिस्से तक सीमित रही जहां ईंट और टीनशेड रखे होने की बात सामने आई थी, जबकि रास्ते की पूरी लंबाई और वास्तविक आवागमन की स्थिति का समाधान अब भी स्पष्ट नहीं है।
- कागज पर निस्तारण या जमीन पर समाधान?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल IGRS शिकायत के निस्तारण को लेकर उठ रहा है।
ग्रामीणों और शिकायतकर्ता की मांग है कि केवल रिपोर्ट तैयार करने के बजाय मौके पर दोबारा स्थलीय जांच कराई जाए। चकमर्ग की पूरी लंबाई और चौड़ाई की पैमाइश राजस्व अभिलेखों के आधार पर कराई जाए तथा रास्ते की सीमाओं का मौके पर स्पष्ट सीमांकन किया जाए।
साथ ही यह भी जांच हो कि रास्ते पर कूड़ा, ईंट, मोरंग, गिट्टी अथवा अन्य किसी प्रकार का अवरोध मौजूद है या नहीं। यदि अवरोध है तो उसे हटाकर रास्ते को वास्तविक रूप से आवागमन योग्य बनाया जाए।
- ग्रामीणों ने की दोबारा स्थलीय जांच की मांग
ग्रामीणों और शिकायतकर्ता की मांग है कि गाटा संख्या 1418 के चकमर्ग की पुनः निष्पक्ष पैमाइश और स्थलीय जांच कराई जाए। जांच के दौरान मौके की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराकर रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि राजस्व अभिलेख और जमीनी स्थिति के बीच यदि कोई अंतर है तो वह स्पष्ट हो सके।
साथ ही प्रशासन यह भी स्पष्ट करे कि यदि चकमर्ग को रिपोर्ट में पूरी तरह खाली बताया गया है, तो मौके पर आवागमन में बाधा किस कारण से बनी हुई है और उस बाधा को दूर करने की जिम्मेदारी किस स्तर के अधिकारी की है।
- अब निगाह जिला प्रशासन पर
गाटा संख्या 1418 का मामला अब केवल एक रास्ते के विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। यह सवाल IGRS शिकायतों के वास्तविक निस्तारण और प्रशासनिक रिपोर्ट की जमीनी हकीकत से भी जुड़ गया है।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में दोबारा स्थलीय जांच और पैमाइश कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या नहीं।
सवाल यही है—क्या IGRS शिकायत का वास्तविक समाधान हुआ है, या सिर्फ कागजों पर निस्तारण दर्ज कर दिया गया?
अब ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि गाटा संख्या 1418 के चकमर्ग को वास्तविक रूप से अतिक्रमण और अवरोध से मुक्त कराकर सुचारु आवागमन सुनिश्चित कराया जाता है या नहीं।
पत्रकार — राम भुवाल पाल











