बाबागंज में झोलाछाप डॉक्टरों पर गंभीर सवाल, बुजुर्ग की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे प्रश्न
पैथोलॉजी सेंटर और कथित अवैध इलाज को लेकर कार्रवाई की मांग, ग्रामीणों की सुरक्षा पर चिंता
रिपोर्टर: सुभाष सोनकर | SP न्यूज़ एवं स्कॉलर टाइम्स अखबार
बाबागंज, प्रतापगढ़। बाबागंज ब्लॉक क्षेत्र में कथित झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा इलाज किए जाने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के आसपास संचालित कुछ चिकित्सा प्रतिष्ठानों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता और सुविधाओं के बिना मरीजों का इलाज किया जा रहा है, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
ताजा मामला नगर पंचायत हीरागंज के अंतर्गत कल्याणपुर निवासी 80 वर्षीय रामखेलावन प्रजापति से जुड़ा है। परिजनों और स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग का इलाज जयचंदपुर स्थित लाइफ केयर पैथोलॉजी सेंटर से जुड़े मामले में चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और मंगलवार को उनकी मृत्यु हो गई। हालांकि, मृत्यु के कारणों और इलाज के बीच संबंध की पुष्टि चिकित्सकीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाबागंज क्षेत्र के विभिन्न बाजारों में कथित झोलाछाप चिकित्सक सक्रिय हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और उचित चिकित्सा सुविधाओं की कमी के चलते कई लोग ऐसे लोगों से इलाज कराने को मजबूर हो जाते हैं। यदि बिना आवश्यक योग्यता के दवाइयां दी जा रही हैं या इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं, तो यह मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को ऐसे चिकित्सा प्रतिष्ठानों की नियमित जांच करनी चाहिए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, ग्रामीणों को भी इलाज कराने से पहले चिकित्सक की योग्यता और संबंधित संस्थान के पंजीकरण की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
पूर्व में भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
स्थानीय स्तर पर यह भी बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष लखपेड़ा बाजार में एक पांच वर्षीय बालक की कथित तौर पर इंजेक्शन लगाए जाने के बाद एक क्लीनिक पर मौत हो गई थी। उस समय घटना को लेकर बाजारवासियों और क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश फैल गया था। आरोप है कि मामला सामने आने के बाद संबंधित चिकित्सक क्लीनिक छोड़कर चला गया था। इस घटना के संबंध में आधिकारिक अभिलेखों और जांच की स्थिति की पुष्टि किया जाना आवश्यक है।
जांच और कार्रवाई की मांग
लगातार सामने आ रहे आरोपों के बीच स्वास्थ्य विभाग से मांग की जा रही है कि लाइफ केयर पैथोलॉजी सेंटर सहित संबंधित चिकित्सा प्रतिष्ठानों की जांच कराई जाए। साथ ही, 80 वर्षीय रामखेलावन प्रजापति की मृत्यु के मामले में इलाज से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाए, ताकि वास्तविक कारण सामने आ सके।
अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को सुरक्षित एवं योग्य चिकित्सकों से उपचार उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाता है।









