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50 साल पुरानी नाली और सार्वजनिक रास्ता बंद करने का आरोप, जलनिकासी ठप होने से ग्रामीणों में आक्रोश

50 साल पुरानी नाली और सार्वजनिक रास्ता बंद करने का आरोप, जलनिकासी ठप होने से ग्रामीणों में आक्रोश

थाने में शिकायत लेकर पहुंचे ग्रामीण, कार्रवाई न होने से जताई नाराजगी; नाली और रास्ता खुलवाने की उठाई मांग

दिनेश कुमार पाल

प्रतापगढ़। जनपद के संग्रामगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम डंडिया खनवारी में जल निकासी और सार्वजनिक रास्ते को लेकर विवाद सामने आया है। गांव के कुछ लोगों पर करीब 50 वर्ष पुरानी सार्वजनिक नाली और ग्रामीणों के आवागमन के रास्ते को कथित रूप से बंद करने का आरोप लगाया गया है। नाली बंद होने से गांव के पानी की निकासी बाधित हो गई है, जिससे जलभराव की समस्या उत्पन्न होने की आशंका के साथ ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसको लेकर गांव के लोगों में नाराजगी व्याप्त है। पीड़ित महिला समेत कई ग्रामीणों ने संग्रामगढ़ थानाध्यक्ष को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर मामले में जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

50 वर्ष पुरानी नाली बंद करने का लगाया आरोप

थाने में दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र के अनुसार, ग्राम डंडिया खनवारी निवासी संगीता देवी पत्नी विमल कुमार सरोज ने आरोप लगाया है कि 4 नवंबर 2026 को गांव के ही कुछ लोगों ने मिलकर गांव के पानी की निकासी के लिए बनी पुरानी नाली को बंद कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह नाली लगभग 50 वर्षों से गांव के पानी की निकासी का प्रमुख माध्यम रही है। इसी नाली के सहारे गांव के घरों और आबादी क्षेत्र का पानी बाहर निकलता था।

आरोप है कि संबंधित लोगों ने आबादी और सरकारी जमीन पर कथित रूप से कब्जा कर सार्वजनिक नाली को बंद कर दिया है। इससे गांव की जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, लंबे समय से उपयोग में आ रही सार्वजनिक नाली बंद होने से पूरे गांव के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।

रास्ता बंद होने से खेती-किसानी पर भी असर

ग्रामीणों ने नाली बंद करने के साथ ही सार्वजनिक रास्ते को भी बाधित किए जाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस रास्ते का इस्तेमाल गांव के लोग लंबे समय से खेतों तक आने-जाने के लिए करते रहे हैं। रास्ता बंद होने के कारण अब ट्रैक्टर और अन्य कृषि वाहन खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे किसानों को खेती-किसानी के कार्यों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही नाली और रास्ते की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो गांव में जलभराव की स्थिति गंभीर हो सकती है। बारिश के मौसम में भी लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है। सार्वजनिक रास्ता बाधित होने से आम लोगों के आवागमन पर भी असर पड़ रहा है।

महिलाओं और पुरुषों ने हस्ताक्षर कर लगाई गुहार

मामले को लेकर संगीता देवी के साथ गांव की अन्य महिलाओं और पुरुषों ने भी अपनी आवाज उठाई है। शिकायती पत्र पर गीता देवी, गायत्री देवी, श्वेता देवी, रवि और भानू कुमार समेत अन्य ग्रामीणों ने हस्ताक्षर कर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।

ग्रामीणों ने थानाध्यक्ष से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और राजस्व विभाग के माध्यम से संबंधित नाली एवं सार्वजनिक रास्ते की भूमि की पैमाइश कराई जाए। यदि सरकारी या सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए नाली और रास्ते को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक नाली और रास्ते का विवाद केवल एक परिवार का मामला नहीं है, बल्कि इससे पूरे गांव के लोगों का जनजीवन और किसानों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। इसलिए प्रशासन को मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान कराना चाहिए।

फिलहाल ग्रामीणों ने शिकायती प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। अब देखना होगा कि संबंधित पुलिस और राजस्व विभाग की ओर से मामले की जांच कर क्या कार्रवाई की जाती है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप कर वर्षों पुरानी जल निकासी व्यवस्था और सार्वजनिक रास्ते को बहाल कराएगा।

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