कौशाम्बी: चायल तहसील का कानूनगो सुरेन्द्र सिंह बन बैठा ‘जज’ न्यायालय में मामला विचाराधीन, फिर भी जमीन खाली कराने का आरोप
बिना आदेश, बिना नोटिस आखिर किसके इशारे पर हुई कार्रवाई कूरा गांव के गाटा संख्या 17 का मामला कानूनगो और लेखपाल की भूमिका पर उठे सवाल
रिपोर्ट अमित कुमार
कौशाम्बी। चायल तहसील में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सराय अकिल थाना क्षेत्र के कूरा गांव में गाटा संख्या 17 की जमीन को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्व कर्मचारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद कानूनगो सुरेन्द्र सिंह विपक्षी पक्ष से मिलकर मौके पर पहुंचे और बिना किसी आदेश या नोटिस के जमीन खाली करा दी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कानूनगो सुरेन्द्र सिंह खुद ही जज बन बैठे, या फिर किसी सक्षम अधिकारी के आदेश पर कार्रवाई की गई?
न्यायालय में मामला लंबित, फिर कानूनगो ने किस अधिकार से कराया जमीन खाली?
जब जमीन का विवाद न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है, तो मौके पर जमीन खाली कराने की कार्रवाई का आधार क्या था? क्या कानूनगो के पास कोई लिखित आदेश था? क्या संबंधित पक्ष को नोटिस दिया गया? क्या कार्रवाई से पहले न्यायालय के आदेशों और राजस्व अभिलेखों की विधिवत जांच की गई? यदि बिना सक्षम आदेश के जमीन खाली कराई गई, तो यह प्रशासनिक अधिकारों के इस्तेमाल और प्रक्रिया के पालन से जुड़ा गंभीर सवाल है। इन आरोपों की सच्चाई निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
विपक्षी से मिलीभगत का आरोप, राजस्व विभाग की भूमिका पर सवाल
मामले में कानूनगो सुरेन्द्र सिंह पर विपक्षी पक्ष से मिलकर कार्रवाई कराने का आरोप लगाया गया है। अब जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि मौके पर कार्रवाई किसके निर्देश पर हुई, संबंधित लेखपाल की क्या भूमिका रही और क्या किसी लिखित आदेश का पालन किया गया था। यदि किसी कर्मचारी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर किसी पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाया है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर जमीन संबंधी विवादों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है?
पहले भी लग चुके हैं जमीन पर कब्जा कराने के आरोप।
स्थानीय स्तर पर कानूनगो सुरेन्द्र सिंह पर पहले भी जमीन पर कब्जा कराने से जुड़े आरोप लगाए जाने की बात कही जा रही है। इन पुराने आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और उन पर हुई कार्रवाई का विवरण सामने आना अभी बाकी है। यदि पहले भी शिकायतें हुई थीं, तो राजस्व विभाग को यह बताना चाहिए कि उनकी जांच किस स्तर पर हुई और क्या निष्कर्ष निकला। शिकायतों को नजरअंदाज किया गया या जिम्मेदारी तय की गई—यह भी जांच का अहम हिस्सा होना चाहिए।
एसडीएम चायल के संज्ञान में मामला, जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा
मामला उपजिलाधिकारी चायल के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने जांच कर कानूनगो और लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। अब निगाहें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। जरूरत है कि न्यायालय में लंबित मुकदमे की स्थिति, संबंधित आदेशों, राजस्व अभिलेखों, मौके की कार्रवाई और दोनों पक्षों के बयानों की निष्पक्ष जांच की जाए। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
बड़े सवाल: राजस्व विभाग जवाब देगा या मामला ठंडे बस्ते में जाएगा?
न्यायालय में मामला विचाराधीन था, तो जमीन खाली कराने का आदेश किसने दिया बिना नोटिस और लिखित आदेश के कार्रवाई हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है कानूनगो और लेखपाल की भूमिका की जांच कितने निष्पक्ष तरीके से होगी क्या पहले की शिकायतों की भी पड़ताल होगी यदि नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो क्या केवल जांच होगी या जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी होगी अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या राजस्व कर्मचारी कानून के दायरे में रहकर काम करेंगे या मौके पर ही फैसले सुनाने लगेंगे कूरा गांव के गाटा संख्या 17 का मामला प्रशासन के लिए निष्पक्षता और जवाबदेही साबित करने की परीक्षा है। अब देखना होगा कि एसडीएम चायल की जांच में क्या सामने आता है और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।










